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एक मछली जो आपको ले जाएगी सितारों की ऊंचाई में | लेकिन दे जाएगी एक बुरा सपना |

जब नशे की बात होती है या फिर यू कह लो की जश्न की बात होती है ,जश्न कोई भी हो नए साल का जश्न या फिर जन्म दिन  पार्टी का जश्न ,इस मौज मस्ती के दौरान आज कल की यूवा को नशा न मिले तो जश्न-जश्न नन्ही माना जाता !

कोई तो अपने आप को शराब में डूबा लेता है और कोई फिर पुरानी घाष उपयोग में लता है | मानवता का नशे से आकर्षण  सदियों पुराना है|

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image source:inquisitr.com

psychedelic chemicals विज्ञानं ने नशे की बहुत नयी किश्म विकसित कर ली है जो नशे की दीवानगी को उँचइयो तक ले जाती है |यंहा हम एक एसा नशा बताने जा रहे है जो कि बहुत ही उम्दा किश्म का नशा है वो नशा है सर्पा सल्पा मछली का  इस मछली के बारे में ये कहा गया है |इस को एक आम मछली की डिश की तरह खायेंगे और ये आपको एक कोकीन की तरफ असर करेगी |

नारंगी धारीदार मछली प्रजातियां आमतौर पर अफ्रीका और भूमध्य सागर के पश्चिमी तट अटलांटिक में पाई जाती है |

 

image source: wikipedia
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देखने में ये मछली पूरी तरह से हानिरहित लग सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये आप को धोखा है। क्योंकि इस छोटी मछली को खाने के बाद ये आप को कुछ दिनों के लिए बुरा सपना दे या हो सकता है आप को भ्रम कर दे और एसी चीजें आप को दिखें जो आपने पहले कभी नहीं देखी हों।

इस मछली के नाम को अरबी में ट्रांसलेट करते हैं तो यह मीनिंग निकलता है कि "एक मछली जो सपने दिखाती है"|
जर्नल ऑफ क्लीनिकल विष विज्ञान में प्रकाशित एक 2006 की रिपोर्ट में इस मछली खाने के साइकेडेलिक अनुभव के दो मामलों का वर्णन है।

पहली घटना 1994 में हुई जब एक आदमी अपनी छुट्टियां मना रहा था और शाल्पा मछली से बना हुआ भोजन खाने के बाद उसे मिचली सी महसूस हुई और यह सब होने के बाद उसकी छुट्टियां तो बर्बाद हो गई और उसने घर वापस लौटने का निर्णय लिया जब वह ड्राइव कर रहा था तो उसे अजीब सी चीजें दिखाई देने लगी और उसने अपने आप को अस्पताल में एडमिट कराया वहां से वह 36 घंटे में अपने आप को रिकवर कर पाया और उससे पूछा गया की उसके साथ क्या हुआ था तो वो सब भूल चूका था |

दूसरी घटना 90 वर्षीय आदमी के साथ हुई उसने इस मछली का खाना खाने के बाद वह चिल्ला चिल्ला के डरावने पक्षियों से डरने लगा और उसे भ्रम हो गया कि वह पछी उसे डरा रहे हैं कुछ लोग कहने लगे कि एक मानसिक बीमारी हो सकती है उम्र के कारण लेकिन बाद में उसे कुछ लोगों ने जहर कंट्रोल केंद्र पर उस को दिखाया
अभी तक वैज्ञानिक पता नहीं लगा पाये हैं कि आखिर यह मछली इतना प्रभाव क्यों करती है, मछली के सारे अंग जहरीले नन्ही होते जैसे की मछाले का सर ज्यादा जहरीला होता है बाकि अंगो के मुकाबले | मौसम भी एक अलग रोल प्ले करता है 2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार शरद ऋतु में यह मछली खाने पर बहुत ही जहरीला प्रभाव पड़ता है|

क्या आप वाकई इस मछली को चखना चाहोगे |

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