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अगर नौकरी चाहिए तो बंदर पकड़ना सीख लो मिलेंगे 18000 रुपए प्रतिमाह

लग रहा है दिल्ली नगर निगम बंदरों से खासा परेशान हो चुका है. इसलिए उसने पहले एक विज्ञापन दिया था उसमें था कि अगर कोई बंदर पकड़ता है .उसे प्रति बंदर के हिसाब से पैसे दिए जाएंगे लेकिन यह स्कीम सफल नहीं हो पाई जिसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली |

अब उन्होंने एक नया विज्ञापन दिया है कि वह दिल्ली में बंदर पकड़ने वालों को 18000 रुपए प्रतिमाह की नौकरी पर रखेंगे बंदर और आवारा कुत्तों की वजह से सारी दिल्ली ही परेशान है.

आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए तो कुछ संस्थाएं लगी हुई है लेकिन बंदरों पर लगाम लगाने के लिए कोई संस्था काम नहीं कर रही है पहले नगर निगम ने प्रति बंदर पकड़ने वाले को ₹800 देने का फैसला लिया था लेकिन यह बाद में ₹1200 शुरू कर दी गई इसके बावजूद भी बंदर ज्यादा पकड़ने में सफलता नहीं मिली लेकिन अब डॉक्टर पुनीत गोयल ने अगले फाइनेंसियल ईयर के बजट में जो एक नगर निगम आयुक्त हैं दिल्ली के यह प्रस्ताव रखा है कि वह  बंदर पकड़ने वाले को नौकरी पर रखेंगे जिसकी प्रतिमाह वेतन 18000 होगा |

हमें लगता है कि दिल्ली नगर निगम का यह फैसला बहुत ही कारगर साबित हो सकता है जैसा कि हम जानते हैं बंदर ऐसी प्रजाति है जो एक इलाके में रहने वाले साला जनजीवन को बहुत ही अस्त-व्यस्त कर देते हैं अगर कोई इंसान पॉलिथीन में लटका कर कोई चीज ले जा रहा है तो उसे फाड़ कर खा जाते हैं और कभी कभी तो यहां तक बात पहुंच जाती है कि वह चलते हुए राहगीर को भी काटने लग जाते हैं किसी छोटे बच्चे को नुकसान पहुंचा देते हैं फिर उसके बाद बीमारियां होने का खतरा हो जाता है | कभी कभी किसी की मृत्यु का कारण भी बन्दर बन जाते है |

एक बार बंदरों के आतंक का विवरण हम यहां दे रहे हैं जो बहुत ही हानिप्रद है एक बार दक्षिणी दिल्ली के कार्यालय होता है सरकारी कर्मचारियों का जिसमें बहुत ही गोपनीय दस्तावेज रखे हुए होते हैं और जिस दिन इतवार के दिन दफ्तर बंद होता है उस दिन बंदर आते हैं |बंदर पूरा गैंग लेकर आते हैं और एक एक बन्दर  में खोजबीन करते हैं कि कुछ खाने का मिल जाओ उस कुछ भी वह दफ्तर के सारे गोपनीय दस्तावेजों को फाड़ देते हैं और कंप्यूटर तोड़ देते हैं बहुत ही नुकसान करते हैं यह बंदरों के आतंक का बहुत ही हानिप्रद रूप है जिससे दिल्ली प्रशासन को यह निर्णय लेना पड़ा |

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